कृषि विकास के अगले चरण के लिए 22 राज्यों ने प्राकृतिक खेती को दिया बड़ा समर्थन: केंद्र

नई दिल्ली, 30 मई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि 22 राज्यों के कृषि मंत्रियों ने न केवल नीतिगत स्तर पर प्राकृतिक खेती का समर्थन किया है, बल्कि किसानों का विश्वास बढ़ाने के लिए अपने खेतों में भी इसे अपनाकर प्रयोग किए हैं।

कृषि मंत्रियों ने राष्ट्रीय राजधानी के पूसा परिसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन के दौरान एक मंच पर आकर किसानों के जीवन को बेहतर बनाने और प्रभावी क्रियान्वयन तथा समन्वित प्रयासों के माध्यम से कृषि क्षेत्र को मजबूत करने पर चर्चा की।

इस दौरान, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जोर देते हुए कहा कि खेतों की रक्षा केवल कृषि भूमि को बचाने का विषय नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण, राष्ट्र और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने से भी जुड़ा हुआ है।

सम्मेलन के दौरान उन्होंने राज्य सरकारों से प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और अनावश्यक जटिलताओं को दूर करने का आग्रह किया, ताकि किसान सरकारी योजनाओं का अधिक प्रभावी ढंग से लाभ उठा सकें।

इसी संदर्भ में उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि रासायनिक उर्वरकों पर पूरी तरह रोक लगाना सरकार का उद्देश्य नहीं है, बल्कि उनका वैज्ञानिक, संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके लिए उन्होंने देशव्यापी जन-जागरूकता अभियान और संस्थागत पहल चलाने का आह्वान किया।

चौहान ने यह भी कहा कि इस अभियान को केवल अपील तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समन्वित व्यवस्था, निगरानी तंत्र और विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाने चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम हासिल हो सकें।

यह सम्मेलन प्रतिबद्धता, समन्वय और जमीनी क्रियान्वयन के राष्ट्रीय मंच के रूप में उभरकर सामने आया। सम्मेलन में खरीफ फसलों की तैयारी, दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, उर्वरकों का संतुलित उपयोग, प्राकृतिक खेती और प्रस्तावित 'खेत बचाओ अभियान' जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर साझा रोडमैप तैयार किया गया।

राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार कृषि को केवल उत्पादन के नजरिए से नहीं देखती, बल्कि इसे मिट्टी के स्वास्थ्य, पर्यावरणीय स्थिरता, पोषण सुरक्षा, किसानों की समृद्धि और आने वाली पीढ़ियों के कल्याण से जुड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारी मानती है।

सम्मेलन में यह भी रेखांकित किया गया कि अब खरीफ फसलों की योजना केवल मौसमी तैयारियों तक सीमित नहीं रहेगी। इसे दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, मिट्टी के स्वास्थ्य, कृषि लागत के विवेकपूर्ण प्रबंधन और कृषि उत्पादकता में निरंतर वृद्धि जैसे व्यापक लक्ष्यों से भी जोड़ा जाएगा।

--आईएएनएस

डीबीपी

Related posts

Loading...

More from author

Loading...