Green Building India Growth : उत्तर भारत बना ग्रीन बिल्डिंग का नया हब, एनसीआर और यूपी आगे: विशेषज्ञ

एनसीआर और उत्तर प्रदेश में ग्रीन बिल्डिंग का तेजी से विस्तार, IGBC समिट में सतत विकास पर जोर।
उत्तर भारत बना ग्रीन बिल्डिंग का नया हब, एनसीआर और यूपी आगे: विशेषज्ञ

नई दिल्ली: उत्तर भारत में ग्रीन बिल्डिंग को अपनाने की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है, जिसमें एनसीआर पहले स्थान पर और उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर उभरकर सामने आया है। यह जानकारी विशेषज्ञों ने बुधवार को दी।

सीआईआई भारतीय हरित भवन परिषद (आईजीबीसी) द्वारा आयोजित ग्रीनटेक समिट 2026 में बताया गया कि उत्तर प्रदेश में 1,673 आईजीबीसी-पंजीकृत प्रोजेक्ट दर्ज किए गए हैं, जो 1.78 बिलियन वर्ग फुट क्षेत्र में फैले हैं। यह राज्य में तेजी से बढ़ती सतत विकास की दिशा को दर्शाता है।

वहीं, नई दिल्ली में 794 प्रोजेक्ट 0.63 बिलियन वर्ग फुट क्षेत्र में फैले हुए हैं, जिससे राजधानी क्षेत्र ग्रीन बिल्डिंग मूवमेंट में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

पूरे एनसीआर क्षेत्र में ग्रीन बिल्डिंग का दायरा और भी बड़ा है, जहां कुल 2,475 प्रोजेक्ट 2.81 बिलियन वर्ग फुट क्षेत्र में फैले हुए हैं।

उत्तर प्रदेश में यह विकास प्रमुख शहरों में विभाजित है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 748 प्रोजेक्ट, गुरुग्राम में 651 प्रोजेक्ट, जबकि फरीदाबाद और गाज़ियाबाद में मिलाकर 282 प्रोजेक्ट दर्ज किए गए हैं।

इस आयोजन में उद्योग जगत के प्रतिनिधि, नीति निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ और सस्टेनेबिलिटी एक्सपर्ट्स शामिल हुए, जिन्होंने भारत के निर्माण क्षेत्र में क्लाइमेट टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने पर चर्चा की।

समिट में यह भी कहा गया कि भारत ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य और नेट जीरो की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसे में ग्रीन टेक्नोलॉजी, लो-कार्बन मटेरियल, डिजिटलीकरण और इंटीग्रेटेड डिजाइन भविष्य के शहरों को टिकाऊ और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।

आईजीबीसी दिल्ली चैप्टर के को-चेयर और ब्रुकफील्ड प्रॉपर्टीज के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट बलजीत सिंह ने कहा, “भारत के पास अभी अपनी अधिकांश इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना बाकी है। ऐसे में हमारे पास जलवायु-अनुकूल डिजाइन, लो-कार्बन तकनीक और डिजिटल इनोवेशन के जरिए भविष्य के शहरों को आकार देने का बड़ा अवसर है।”

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उत्तर प्रदेश में ग्रीन बिल्डिंग को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत समर्थन मिल रहा है। इसमें आईजीबीसी गोल्ड या उससे ऊपर की रेटिंग वाले प्रोजेक्ट्स को अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) देने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

साथ ही ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएनआईडीए) द्वारा ऐसे प्रोजेक्ट्स को 5 प्रतिशत अतिरिक्त एफएआर मुफ्त देने की व्यवस्था भी की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन, ऊर्जा मॉनिटरिंग और सख्त मटेरियल मानकों के कारण निर्माण लागत में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

--आईएएनएस

 

 

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