भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर चर्चा के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल 1 जून को दिल्ली आएगा

नई दिल्ली, 27 जून (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर चर्चाओं को आगे बढ़ाने के लिए, मुख्य वार्ताकार के नेतृत्व में अमेरिकी टीम 1 से 4 जून 2026 तक भारत का दौरा करेगी। यह जानकारी वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से बुधवार को दी गई।

मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इस दौरान अंतरिम समझौते के विवरण को अंतिम रूप देने और बाजार पहुंच, गैर-टैरिफ उपाय, सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा, निवेश प्रोत्साहन, आर्थिक सुरक्षा संयोजन जैसे कई क्षेत्रों पर व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत वार्ताओं को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव है।

भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी 2026 को एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर पारस्परिक और आपसी रूप से लाभकारी व्यापार से संबंधित एक अंतरिम समझौते की संरचना पर सहमति व्यक्त की। इस संरचना ने व्यापक भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता वार्ता के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

इससे तहत, भारतीय पक्ष ने 20 से 23 अप्रैल 2026 तक अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ व्यक्तिगत बैठकों के लिए वाशिंगटन डीसी का दौरा किया।

इससे पहले हाल ही में भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा और इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। साथ ही कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय साझेदारी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में रुबियो ने कहा, "हमने द्विपक्षीय व्यापार वार्ता में बड़ी प्रगति की है और मुझे लगता है कि हम अमेरिका और भारत के बीच एक ऐसे व्यापार समझौते पर पहुंचेंगे जो दीर्घकालिक होगा, दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होगा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए टिकाऊ होगा।"

ट्रंप सरकार की ओर से भारत पर लगाए गए टैरिफ पर रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की आर्थिक रणनीति किसी विशेष राष्ट्र को निशाना बनाने के बजाय अमेरिका के वैश्विक व्यापार ढांचे के पुनर्गठन पर केंद्रित है।

उन्होंने कहा, "यह केवल अमेरिका के व्यापार के बारे में थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने कभी नहीं कहा कि कोई ऐसा तरीका निकालो, जिससे भारत के साथ टकराव बढ़े। हमारे समाने अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़ी कुछ ऐसी चुनौतियां हैं, जिनके साथ आगे नहीं जाया जा सकता।"

--आईएएनएस

एबीएस

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