भारत को शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर में 2037 तक 80 लाख करोड़ रुपए के निवेश की आवश्यकता : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 15 मई (आईएएनएस)। भारत को तेज शहरीकरण और आर्थिक ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर में 2037 तक 80 लाख करोड़ रुपए के निवेश की आवश्यकता होगी। यह जानकारी शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ब्रिकवर्क रेटिंग्स (बीडब्ल्यूआर) की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2036 तक भारत की जीडीपी में शहरी क्षेत्रों का योगदान लगभग 70 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जिससे सतत शहरी वित्तपोषण एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार का 1 लाख करोड़ रुपए अर्बन चैलेंज फंड (यूसीएफ), भारत के शहरी विकास वित्तपोषण मॉडल में एक बड़ा बदलाव है। यह योजना अनुदान-आधारित कार्यक्रम से हटकर बाजार-आधारित ढांचे की ओर बढ़ रही है, जिसका उद्देश्य पांच वर्षों में लगभग 4 लाख करोड़ रुपए का कुल शहरी निवेश जुटाना है।

केंद्रीय सहायता प्राप्त करने से पहले, शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) को नगरपालिका बांड, बैंक ऋण या पीपीपी के माध्यम से परियोजना वित्तपोषण का कम से कम 50 प्रतिशत जुटाना होगा।

इसके अलावा, सरकार परियोजना लागत का 25 प्रतिशत वहन करती है, और शेष राशि राज्यों और यूएलबी द्वारा वित्तपोषित की जाती है।

रिपोर्ट में बताया गया कि इस मॉडल का उद्देश्य अनुशासन, पारदर्शिता और साख को मजबूत करना है, जबकि बीडब्ल्यूआर ने इसके कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण जोखिमों की ओर ध्यान दिलाया है। साथ ही, बाजार वित्तपोषण प्राप्त करने के लिए शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के लिए क्रेडिट रेटिंग के महत्व पर जोर दिया।

हालांकि, बैंक ऋणों के लिए औपचारिक रेटिंग की आवश्यकता नहीं होती है, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि केवल संस्थागत ऋण पर निर्भरता शहरों को राज्य की गारंटी पर निर्भर रखती है और विविधीकरण को सीमित करती है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के सीईओ मनु सहगल ने कहा, “यूसीएफ भारत के नगरपालिका वित्त पारिस्थितिकी तंत्र को काफी मजबूत कर सकता है, विशेष रूप से नगरपालिका बांड बाजार में भागीदारी बढ़ाकर। वित्त वर्ष 2018 से, केवल 17 शहरों ने 45.4 अरब रुपए के नगरपालिका बांड जारी किए हैं, जो इस क्षेत्र में मौजूद विशाल अप्रयुक्त वित्तपोषण अवसर को उजागर करता है।”

सहगल ने आगे कहा कि यूसीएफ द्वारा शुरू की गई 5,000 करोड़ रुपए की क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी योजना छोटे यूएलबी को पहली बार लिए गए ऋणों के लिए गारंटी प्रदान करके निवेशकों का विश्वास बढ़ा सकती है, जिससे उधारदाताओं और निवेशकों के लिए निवेश योग्य क्षेत्र का विस्तार होगा।

--आईएएनएस

एबीएस/

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