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कोरोना की दूसरी लहर पत्रकारिता पर पड़ी सबसे ज्यादा भारी

कोरोना की दूसरी लहर पत्रकारिता पर पड़ी सबसे ज्यादा भारी
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कोरोना की दूसरी लहर से पूरे भारत में तबाही सी मची हुई है। इससे शायद कोई ही अछूता बचा होगा। वैसे तो इसका सबसे ज्यादा प्रभाव आम मजदुर वर्ग को उठाना पड़ा है लेकिन इस बार पत्रकारिता जगत में भी कुछ चेहरे ऐसे थे जो कोरोना का ग्रास बन गए। अभी कुछ दिन पहले ही आज तक के अनुभवी और जानेमाने पत्रकार रोहित सरदाना की मौत से मानों हड़कंप सा मच गया हो। ऐसा नहीं है की रोहित सरदाना इकलौते पत्रकार थे जो कोरोना का शिकार हुए हों कई पत्रकार हैं जो अभी तक कोरोना का शिकार हुए हैं। आज इस लेख के माध्यम से हम विश्लेषण करेंगे कि कोरोना की दूसरी लहर पत्रकारिता जगत पर कितनी भारी रही है।

अभी कुछ दिन पहले ही दैनिक जागरण बिजनौर के वरिष्ठ पत्रकार आशिक हुसैन की कोरोना से मौत हो गई। परिजन उन्हें कई अस्पतालों में ले गए, लेकिन उपचार नहीं मिल पाया। इसके अलावा दैनिक भास्कर के बरिष्ठ पत्रकार मनोज झा की भी कोरोना से मौत हो गई इनको भी बताया जा रहा है की समय से उपचार नहीं मिल पाया था। एक अन्य बड़े समूह हिंदी दैनिक तरुण मित्र के समूह संपादक व‌ लोकतंत्र रक्षक सेनानी परम श्रद्धेय कैलाश नाथ जी का कोरोना से निधन हो गया था। एक और बहु चर्चित पत्रकार दैनिक जागरण गाजीपुर के पूर्व ब्यूरोचीफ व वरिष्ठ पत्रकार रत्नाकर दीक्षित का कोरोना से निधन उत्तर प्रदेश पत्रकारिता को बड़ा झटका माना जा रहा है। इसके अलावा दूरदर्शन की मशहूर एंकर कनुप्रिया पटेल भी कोरोना का शिकार हो गई उनकी मौत रोहित सरदाना की मौत से एक दिन पहले हुई थी। कुछ दिन पहले ही बंगाल के बरिष्ठ पत्रकार गोपाल प्रसाद यादव भी कोरोना वायरस का शिकार हो गए। आगरा दैनिक जागरण के फोटो जर्नलिस्ट अमित भारद्वाज की भी कोरोना से मौत हो गई थी। इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार और राष्ट्रीय राजधानी में असम सहित पूर्वोत्तर मामलों के अच्छे जानकार कल्याण बरूह का असामयिक निधन भी पत्रकारिता जगत के लिए बड़ा झटका था। एक मामला तो ऐसा भी है जिसे सुन कर हमारी रूह कांप जाए। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में पत्रकार चंदन सिंह की लाश तीन दिनों तक पड़ी रही। किसी कारण वश परिवार का सदस्य अंतिम संस्कार के लिए नहीं आया तो पुलिस कर्मियों ने उनका अंतिम संस्कार किया था। आप सोच सकते हैं कि कोरोना का इतना डर की परिवार वाले भी चन्दन सिंह को कंधा देने तक नहीं आए। इसके अलावा कई पत्रकार तो ऐसे हैं जिनके नाम भी सामने नहीं आ सके हैं 10 दिनों में बिहार-झारखंड के दर्जनों पत्रकार मौत का ग्रास बन चुके हैं। इसके आलावा मध्य प्रदेश के बरिष्ठ पत्रकार मनोज राजपूत का भी कोरोना से निधन हो गया था। इसके बाद वरिष्ठ पत्रकार सुकान्त नागार्जुन नहीं रहे। नागार्जुना नवभारत टाइम्स के बरिष्ठ पत्रकार थे। अभी कुछ दिन पहले ही अमर उजाला के डिप्टी न्यूज एडिटर अजय शंकर तिवारी का पैनेशिया में कोरोना संक्रमण से निधन हो गया। राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार अनिल वार्ष्णेय को भी कोरोना ने छीन लिया। उन्होंने जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल में आज सुबह अंतिम सांस ली थी।

अब सोचने बाली बात लगभग 500 से भी ज्यादा पत्रकार इस कोरोना की दूसरी लहर में काल का ग्रास बने हैं। इसके बाबजूद सरकार पत्रकारों को न तो फ्री दवाई लगा रहे हैं और न ही उन्हें कोरोना वॉरियर मान रही है। अर्थ साफ़ है की न्याय का चौथा स्तम्भ खतरे में है।

—दैनिक हाक फीचर्स

Updated : 4 May 2021 7:07 AM GMT
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