Top
Home > मंथन / टिप्पणी / प्रतिक्रिया > मानव तस्करी या ह्यूमन ट्रैफिकिंग में भारत की बदहाल स्थिति

मानव तस्करी या ह्यूमन ट्रैफिकिंग में भारत की बदहाल स्थिति

मानव तस्करी या ह्यूमन ट्रैफिकिंग में भारत की बदहाल स्थिति
X

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की 'ट्रैफिकिंग इन पर्संस 'की 2020 की रिपोर्ट के अनुसार मानव तस्करी जैसी अमानवीय त्रासदी के क्षेत्र में भारत की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।भारत के बारे में यह रिपोर्ट भी है कि 'भारत अभी भी वर्ल्ड ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामले में दुनिया भर में सर्वाधिक अनुकूल ठिकाना बना हुआ है ! प्रश्न ये है कि मानव तस्करी है क्या ? संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार 'किसी व्यक्ति को डराकर, बलपूर्वक या दोषपूर्ण तरीके से कोई कार्य करवाना,एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने या बंधक बनाकर रखने जैसे कृत्य 'मानव तस्करी 'के श्रेणी में आते हैं। ' इसके अलावा भारतीय संसद द्वारा पारित 'मानव तस्करी ( रोकथाम, संरक्षण और पुनर्वास ) विधेयक 2018' के अनुसार सामान्य मानव तस्करी वह है,जिसमें 'बलपूर्वक तरीकों से शोषण के लिए अपहरण करना,धोखाधड़ी व चालाकी करना,लालच देना,शारीरिक या यौन उत्पीड़न करना,दास बनाना,जबरन शरीर के अंग निकालना आदि शामिल है। ' इसी प्रकार गंभीर मानव तस्करी में 'बलात् श्रम करवाने,बच्चे पैदा करने,कम उम्र में यौन परिपक्व करने के लिए रासायनिक या हार्मोन पदार्थ देना,भीख मंगवाने जैसे कुकृत्य हैं। ' मानव तस्करी के मुख्य कारण मुख्य तौर पर अग्रलिखित हैं यथा गरीबी और अशिक्षा,बंधुआ मजदूरी, देह व्यापार, सामाजिक असमानता, क्षेत्रीय लैंगिक असंतुलन, बेहतर जीवन की लालसा,सामाजिक सुरक्षा की चिंता, महानगरों में घरेलू कामों के लिए लड़कियों की तस्करी, चाइल्ड पोर्नोग्राफी के लिए बच्चों की तस्करी आदि। भारत में मानव तस्करी से सबसे ज्यादे पीड़ित राज्य छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम हैं।

वैसे कहने के लिए नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार भारत में मानव तस्करी घट रही है,परन्तु यक्ष प्रश्न है कि जिस देश में श्रम और यौन शोषण की स्थितियाँ बद से बदतर होतीं जा रहीं हैं या और तीव्रता से बढ़ रहीं हैं,वहाँ ये आंकड़े बिल्कुल गलत तस्वीर दिखा रहे हैं। अभी पिछले सालों में मुजफ्फरपुर, देवरिया और कानपुर जैसे शहरों में सरकारी लड़कियों के अनाथालयों में जिस बड़े पैमाने पर सुनियोजित तरीके से अनाथ,अत्यंत गरीब और बेसहारा लड़कियों के साथ जिस प्रकार क्रूरतम् तरीके से उनको प्रताड़ित, अमानुषिक बलात्कार करने और उनके विरोध करने पर उनकी हत्या कर के जमीन में गाड़ देने तक की जैसी वीभत्सम् घटनाएं सामने आईं हैं ! इसके अलावे भी तमाम मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस देश में दलितों, उनकी महिलाओं और लड़कियों से कदाचार और बलात्कार के मामले पिछले चार-पांच साल से बेतहाशा बढ़े हैं इसलिए इस पर कतई विश्वास करना कठिन है कि भारत जैसे देश में मानव तस्करी की दर कम हो रही है ! इसके लिए एक और उदाहरण देना काफी होगा सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1976 से अब तक बंधुआ मजदूरों की संख्या केवल 3 लाख 13 हजार ही है,जबकि इसी काम में लगीं स्वयंसेवी संस्थाओं के अनुसार भारत में बंधुआ मजदूरों की संख्या कम से कम 80 लाख से अधिक ही है।

सबसे दुःखद और कड़वा सच यह है कि मानव तस्करी से महिलाएं और लड़कियां सबसे ज्यादे त्रस्त और पीड़ित हैं,क्योंकि इनमें से अधिकांश की मानव तस्करी यौन शोषण के लिए ही की जाती है। मानव तस्करी में मुख्यरूप से 79 प्रतिशत तक गरीब,वंचित,दलित व आदिवासी बहुल इलाकों की महिलाओं व नाबालिग लड़कियों की तस्करी यौन शोषण के लिए,18 प्रतिशत बलात् श्रम के लिए की जाती है। भारत में 20 प्रतिशत नाबालिग बच्चों तथा अफ्रीका के कुछ हिस्सों में 100प्रतिशत तक नाबालिग बच्चों की तस्करी बलात् श्रम कराए जाने के लिए किया जाता है। दुनियाभर में 2.5 करोड़ महिलाओं, लड़कियों व नाबालिग बच्चों की मानव तस्करी करके उनपर अकथनीय जुल्म किया जा रहा है। इस मामले में कुछ पश्चिमी, मध्य यूरोप, मध्यपूर्व व कुछ पूर्व एशियाई देशों को छोड़कर पूरी दुनिया में मानव तस्करी का अतिघृणित कारोबार लगातार चल रहा है,जिसमें 90 प्रतिशत तक महिलाओं व लड़कियों की यौन उत्पीड़न के लिए तथा विशेषकर दक्षिण एशियाई देशों में 85 प्रतिशत तस्करी बलात् श्रम के लिए की जाती है।

मानव तस्करी रोकने के लिए सन् 2000 में संयुक्त राष्ट्र संघ की तरफ से 'पालेर्मो प्रोटोकॉल 'जैसे अंतर्राष्ट्रीय कानून भी बने हैं। भारतीय संसद द्वारा 'मानव तस्करी ( रोकथाम, संरक्षण और पुनर्वास ) विधेयक 2018 भी बना है,जिसके अंतर्गत एंटी ट्रैफिकिंग पुलिस, विषेश फॉस्ट ट्रैक कोर्ट आदि बनाने का प्रावधान है, लेकिन मानव तस्करी करने वाले मॉफिया, जिसमें औरतें अधिसंख्यक संख्या में हैं,इतनी सशक्त और संगठित हैं कि सरकार द्वारा मानव तस्करी रोकने के लाख यत्नों के बावजूद अपने काम को सफलतापूर्वक अंजाम देने में सफल हो जातीं हैं। इसमें भारत में चहुंओर व्याप्त भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी सबसे बड़ा सहायक है, फिर भी हम उम्मीद करते हैं कि हमारा देश भी एक न एक दिन यूरोप और पश्चिमी सभ्य और शिक्षित देशों की तरह 'मानव तस्करी जैसे सामाजिक कोढ़ से ' एक दिन निजात जरूर पा लेगा। इसके लिए भारत की सरकारें इस बुराई के लिए सबसे बड़े कारण अशिक्षा और गरीबी को दूर करने के लिए इस देश की शिक्षा बजट को और बढ़ाएंगी,क्योंकि देश शिक्षित होगा तो सभी कुछ स्वतः ठीक हो जाएगा।

—दैनिक हाक फीचर्स

Updated : 11 April 2021 8:16 AM GMT
Next Story
Share it
Top