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21वीं सदी में मोटापा सबसे गंभीर बीमारी

21वीं सदी में मोटापा सबसे गंभीर बीमारी
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लंदन: एक अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर के बच्चों में मोटापा बेहद तेजी से बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) ने भी इसे 21वीं सदी की सबसे गम्भीर बीमारी करार दिया है। 2016 के आंकड़ों के अनुसार द्विपीय देश इस मामले में शीर्ष पर हैं। यहां बच्चों में मोटापे की दर 36.7 प्रतिशत है। कूक आईलैंड में 36.1, पलाऊ में 35.5, नियू में 33.3 प्रतिशत, मार्शल आइसलैंड 31.2, तुआलू 31.1, टोंगा 30.1, किरबत्ती 27.5, माइक्रोनेसिया 25.2 और समोआ 24.9 प्रतिशत की दर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2016 के आंकड़ों के अनुसार युगांडा और इथोपिया दुनिया के ऐसे देश हैं जहां बच्चों में मोटापे की दर 1 प्रतिशत से भी कम है। बुकनाफोसा व कम्बोडिया भी इसी सूची में शामिल हैं। इन देशों में 5 से 9 साल की लड़कियों में मोटापे की दर भी 2 प्रतिशत से कम है। रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप के 34 देश बच्चों में मोटापे की बीमारी से परेशान हैं। इन देशों में मोटापे की दर 20 प्रतिशत है। इनमें इटली, ग्रीस, साइप्रस, स्पेन, माल्टा और सैन मेरिनो आदि शामिल हैं। न्यूयार्क स्थित सायराकस यूनिवर्सिटी की ओर से दुनिया में बच्चों के मोटापे पर एक अध्ययन किया गया है। इसके मुताबिक वर्ष 1990 में दुनिया भर में मोटापे से ग्रसित बच्चों की संख्या 3.1 करोड़ थी, जो 2016 में बढ़कर 4.1 करोड़ पहुंच गई। अगले 6 साल में इनकी संख्या करीब दोगुना बढ़कर 7 करोड़ तकपहुंच जाएगी। आंकड़ों के अनुसार भारत में हर 10 में से एक बच्चा मोटा है। 2025 तक मोटापे से पीड़ित बच्चों के मामले में भारत दुनिया के 184 देशों की सूची में दूसरे स्थान पर आएगा, संख्या 1.7 करोड़ पहुंच जाएगी। इस सर्वे के नतीजे देखकर तो लगता है कि अगर आप बच्चों के खान-पान को लेकर सजग नहीं हैं और उन पर कोई रोक-टोक नहीं करते हैं तो यह आपके लिए परेशानी का सबब बन सकता है। इससे आपका बच्चा दुनिया भर के उन बच्चों की सूची में शामिल हो सकता है, जो मोटापे से परेशान हैं।

Updated : 17 March 2019 9:44 PM GMT
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