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कोरोना वायरस से डरें नहीं

कोरोना वायरस से डरें नहीं
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सारी दुनिया इस समय अब तक 70 से ज्यादा देशों में 90 हजार से ज्यादा लोगों को आक्रांत कर 3500 से ज्यादा लोगों की जान ले चुके कोरोना वायरस के संक्रमण से डरी हुई है। क्योंकि एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति में टीकाकरण के अतिरिक्त वायरस प्रभावित रोगों का कोई कारगर चिकित्सा उपलब्ध नहीं है । कोरोना वायरस का अभी तक कोई टीका भी नहीं बना है। इसलिए वे बचाव, कंजरवेटिव ट्रीटमेंट एवं रोगियों के आइसोलेशन पर आश्रित हैं।

लक्षण-

सर्दी जुकाम ,बुखार, सर दर्द, बदन दर्द के साथ प्रारंभ होने वाला यह रोग जल्द ही गले को प्रभावित करते हुए( सोर थ्रोट) फेफड़ों तक पहुंच जाता है और वहां एक्यूट ब्राँकाइटिस एवं आखिर में संक्रामक निमोनिया के रूप में आक्रांत कर अत्यंत कठिन रूप धारण कर लेता है। इस रोग में सर दर्द, खांसी ,बुखार एवं श्वसन में परेशानी 15-20 दिन तक बनी रह सकती है और दवाएं काम नहीं करती प्रतीत होतीं।

प्रसार- कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसी और छींक के माध्यम से ड्रॉपलेट के रूप में बाहर आते हैं जहां से वे सीधे अन्य व्यक्ति द्वारा इन्हेल कर लिए जाते हैं अथवा हाथों को संक्रमित कर अन्य तक पहुंच जाते हैं।मुख्यतः शीत ऋतु में एपिडेमिक के रूप में।

बचाव-

1- किसी भी भयावह रोग से बचने का पहला उपाय है भय मुक्त रहा जाए। भय शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देती है और रोग अपना पैर तेजी से फैलाता है।

2- सर्दी से बचने का उपाय किया जाए।

3- साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए अपने हाथ ,शरीर, घर और आसपास की।

सार्वजनिक स्थानों पर रहने वालों को अपने हाथ दिन भर में कई बार साबुन अथवा किसी एल्कोहलिक डिसइनफेक्टेंट से साफ करते रहना चाहिए।

4- जहां रोग फैला हो अथवा फैलने की संभावना हो उन सार्वजनिक स्थलों पर मास्क लगाया जाए और छींकते , खांसते समय मुंह पर कपड़ा रखा जाए।

5- ज्ञात संक्रमित मरीजों को आइसोलेट किया जाए।

6- व्यायाम, योगासन, प्राणायाम द्वारा शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति (इम्यून)को बढ़ाया जाए।

7- अच्छी तरह धुली हुई हरी सब्जियों का प्रयोग किया जाए । मांसाहार का सेवन एकदम न करें ।

8- आक्रांत स्थानों पर सर्दी ,जुकाम सर दर्द बदन दर्द गले में खराश के लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सीय सलाह ली जाए।

आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में इस वायरस के रोकथाम और इलाज की कारगर औषधियां उपलब्ध हैं । जहां आयुर्वेद में गिलोय, तुलसी, अणूस, काली मिर्च ,छोटी कटेरी, हल्दी, मुलहेठी ,लिसोढ़, इत्यादि से बनी हुई दबाएं एवं काढ़ा स्वसन तंत्र को मजबूत करने वाली एवं रोग मुक्त करने वाली कारगर औषधियां हैं। वहीं होम्योपैथी में उपरोक्त आयुर्वेदिक औषधियों के मदर टिंक्चर क्रमशः टीनेस्पोरा कार्डिफ़ोलिया, आसिमम सैंक्टम, जस्टिसिया अधाटोडा,पाइपर नाइग्रा, सोलेनम जैन्थोस्पर्मम एवं कुरकुमा लौंगा इत्यादि के नाम से उपलब्ध हैं। आवश्यकता पड़ने पर इनका उपयोग उतना ही कारगर साबित होगा ।

लाक्षणिक चिकित्सा पर आधारित होम्योपैथी कोरोना वायरस से आक्रांत मरीजों की चिकित्सा में सबसे ज्यादा कारगर सिद्ध हो सकती है। तथा रोग प्रारंभ होने से पूर्व भी इसकी कुछ औषधियों के प्रयोग से रोग से बचा रहा जा सकता है।

बचाव के लिए उपयोगी होम्योपैथिक औषधियां-

Prophylactic Homeopathic medicines-

प्रथम-

थूजा THUJA 1M , यह होम्योपैथी की मुख्य वायरस प्रतिरोधी औषधि है । साथ ही सर्द हवाओं से होने वाले किसी भी रोग से बचाव भी करती है। संक्रमित जगहों पर रहने वालों को यह दवा पन्द्रह दिन में एक बार पूरे संक्रमण काल में लेते रहना फायदेमंद होगा।

द्वितीय -

इग्नेशिया Ignatia 200, इस औषधि का हफ्ते में एक बार सेवन कोरोना वायरस के भय से मुक्त रखने में कारगर होगा। किसी व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहेगी जिससे उसके ऊपर इस रोग का प्रभाव बहुत सूक्ष्म अथवा नहीं होगा।

तृतीय-

आर्सेनिक अल्ब ARSENIC ALB 200, यह औषधि ठंड से होने वाले सर्दी, जुकाम ,बुखार, निमोनिया की कारगर औषधि तो है ही । साथ ही गोश्त खाने से होने वाली प्रकोपों के लिए महौषधि है। यह औषधि इसे लेने वालों के अंदर व्यवस्था एवं सफाई के प्रति स्वतः ही सजगता उत्पन्न करने की क्षमता रखती है जो कोरोना वायरस से बचने के लिए फायदेमंद होगा। संक्रमित एरिया में इसका 1 दिन नागा करके एक खुराक लेना कारगर साबित होगा।

चतुर्थ-

न्यूमोकोकिनम PNEUMOCOCCINUM 200, यह दवा अकेले कोरोना वायरस की रोकथाम में कारगर सिद्ध हो सकती है ।इस औषधि को संक्रमण काल में सप्ताह में 2 दिन एक- एक खुराक ।और उस दिन उपरोक्त तीनों औषधियां न ली जाएं । इस तरह इन चार औषधियों के प्रयोग से इस रोग को होने से रोका जा सकता है।

रोग उत्पन्न होने के बाद लक्षणानुसार होम्योपैथिक औषधियां-Aconite nap 30.Arsenic alb 30,Antim ars 30, Hepar sulph 30 ,Lycopodium 200 , Phosphorus 30,Antim tart 30, causticum 30,Aspidosperma Q&30,Hepatica30 , रोग भय से पीड़ित होने पर Oxalic acid 200 अथवा Ignatia 200 एक खुराक ।

नोट- उपरोक्त औषधियों को होम्योपैथिक चिकित्सकों की राय पर ही लिया जाना चाहिए।

Updated : 2020-03-19T13:21:21+05:30
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डॉ एम डी सिंह

महाराज गंज, गाजीपुर यू.पी.भारत


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