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ज्वॉइंट रिप्लेसमेंट के माध्यम से करें जोड़ों को युवा

ज्वॉइंट रिप्लेसमेंट के माध्यम से करें जोड़ों को युवा
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पिछले कुछ दशकों में विज्ञान ने बहुत से ऐसे चमत्कार किये है जिनसे कई लोगों को एक नय जीवन जीने की सौगात मिली है। इनमें से कुछ उपब्धियां ऐसी है, जिनमें लोगों को उम्रवृद्धि देने वाली बीमारियों तक का उपाय खोज निकाला है। इनमें से ऐसी ही एक उपलब्धि कुल्हे और घुटने की रिप्लेसमेंट है। दुनिया भर के आर्थोपेडिक सर्जन पहले से ही दर्दनाक और गंभीर स्थितियों के कूल्हे और घुटने प्रतिस्थापन के फायदे की स्थापना कर चुके है और अब इस तरह के उम्र के साथ बढऩे वाले जोड़ों की समस्या को भी पलट चुकी है। आधुनिक तकनीकी ने उन लोगों को भी सामान्य जिंदगी प्रदान की है जो असहनीय दर्द की स्थिति से पीडि़त थे। जोड़ों से संबंधित समस्या लोगों को अपने दिनचर्या के छोटे-मोटे काम को करने से भी रोकती है जैसे जमीन पर बैठना, व्यायाम करना, कार में बैठना और निकलने में परेशानी, अपने दैनिक कार्य पूजा करना, बच्चों के खेलना, एशियाई बार्थरूम का उपयोग करना आदि सब में परेशानी होने लगती है। मुबंई स्थित पीडी हिंदुजा अस्पताल के आर्थोपेडिक सर्जन डा.संजय अग्रवाला का कहना है कि पिछले दस सालों में ज्वाइंटस रिप्लेसमेंट से जुड़ी तकनीकियो में नयें बदलाव आए है जिनसे व्यक्तिअपनी सामान्य जिंदगी में लौट पाना संभव हुआ है और अब वे उन पलों को भी इंजॉय करते है, जिसके लिए पहले वे किसी पर निर्भर रहा करते थे। जैसे परिवार और दोस्तों के साथ बैडमिंटन और क्रिकेट खेलना, बस या ट्रेन में सफर करना, पैरों को जैसे मर्जी हो उस तरह से करके बैठना, बिना किसी परेशानी के मनमुताबिक अवस्था में बैठना या लेटना। यह अवस्था जरूरी नहीं कि बुढ़ापे के कारण आए परंतु कई बार ऐसी समस्याएं या स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिसमें कम उम्र और जवान युवाओं में भी ऐसी समस्याओं का सामना कर पड़ सकता है। अक्सर पहले कुल्हे की सर्जरी के लिए प्लॉटिक के उपर मेटल के हेड का प्रयोग किया जाता था, जोकि छोटे आकार में होता था, परंतु अब बड़े आकार के हेड में भी सेरेमिक पर सेरेमिक का प्रयोग होने लगा है, जोकि लोगों के लिए एक नया जीवन का वरदान साबित हुआ है। यह सर्जरी युवाओं और एक्टिव लोगों के लिए भी उपयुक्त साबित हुई है। उदाहरण के तौर पर श्री.वी.आर.राव जोकि एक युवा छात्र है, वह नेकरोसिस वस्कुलर की समस्या से पिछले पांच साल से ग्रस्त थे। इनके लिए रोजमर्रा के कार्य कर पाना और कार चलाना नमुमकिन सा हो गया था। इस बात का डर कि यदि वह हिप रिप्लेसमेंट करवाते है, तो वह अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जैसे कॉलेज जाना व उसकी गतिविधियों को करना या उसमें हिस्सा ना ले पाना उनके पैर सर्जरी कराने से पीछे खींच रहे थे। लेकिन लार्ज हेड सेरेमिक पर सेरेमिक की हिप रिप्लेसमेंट तकनीक ने उनको उनकी पुरानी जिंदगी जीने का मौका दे दिया है, जिसके चलते वह अपने कॉलेज के चुनाव में भी खड़े हुए। इस तकनीकी के कारण उन लोगों को जीवन में नया मौका मिला है, जो किसी दुर्घटना के कारण अपंगता का शिकार हो गए थे या वह लोग जो 60-70 वर्ष तक की आयु तक आते-आते घुटने की खराबी से ग्रस्त हो जाते है। पहले की घुटने की रिप्लेसमेंट की प्रक्रिया में केवल 90 डिग्री तक ही घुटनों को मोड़ पाना संभव था और छोटे स्टुल पर या इंडिया टॉयलेट का प्रयोग कर पाना अंसंभव था, लेकिन अब नवीनतम तकनीकी ने नया आयाम स्थापित किया है। जिस कारण पूरी तरह लचीला पन आना संभव हुआ है।

डा.संजय अग्रवाल का कहना है कि आमतौर पर सामान्य व्यक्तिको रोजमर्रा की घुटने से जुड़ी गतिविधियों को करने के लिए 125 डिग्री तक की लचीलपन की जरूरत होती है। उदाहरण के लिए सीढिय़ा चढऩे के लिए 75 से 140 डिग्री और बैठने और खड़े होने के लिए 90 से 130 डिग्री और पालथी मारकर बैठने के लिए 130 से 150 डिग्री तक लगता है और अब अत्यधिक लचीलापन वाली नयी तकनीक के कारण घुटने को 155 डिग्री तक मोडऩा संभव हुआ है। इससे यह अर्थ निकलता है कि यदि मरीज को घुटने की रिप्लेसमेंट के बाद उपयुक्तपुर्नसुधार की सुविधा मिलेगी तो पुर्णत: अपने पहले की तरह घुटनों का प्रयोग कर सकेगें। ऐसी ही एक प्रंशासिक तकनीक है परसोना। जोकि घुटनों को न केवल 155 डिग्री तक मोडऩे का लचीलापन देती है, बल्कि मरीज के प्राकृतिक हड्डियों को भी संभालकर रखती है। घुटनों को बहुत ही आराम दायक मोडऩे के कारण यह मरीज को वे सब काम करने की आजादी देती है जिसके लिए उन्हें किसी पर निर्भर रहना पड़ता था। जैसे बेझिझक सीढिय़ा चढ़ जाना, जमीन पर बैठ कर कार्य करना, बच्चों के साथ खेलना और एक नये आत्मविश्वास के साथ जिंदगी के लुफ्त उठाना। तकनीकियों की सफलता बढऩे के कारण लोगों में एक नया जोश आया है और पहले के मुकाबले अब लोग लंबी और स्वस्थ जिंदगी की ओर बढ़ रहे है।

Updated : 2020-02-04T16:21:22+05:30
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