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आइवरमैक्टिन ड्रग से कम किया जा सकता है मलेरिया

आइवरमैक्टिन ड्रग से कम किया जा सकता है मलेरिया
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-वैज्ञानिकों ने ताजे अध्ययन के बाद किया दावा

लंदन: आइवरमैक्टिन ड्रग की मदद से बच्चों में मलेरिया के मामलों को 20 पर्सेंट तक कम किया जा सकता है। हाल ही में किए गए एक ट्रायल में यह बात सामने आई। ट्रायल में पाया गया कि अगर आइवरमैक्टिन ड्रग के डोज़ को मलेरिया के सीज़न के दौरान हर तीन हफ्ते में एक बार बॉडी में इंजेक्ट किया जाए तो इससे पांच साल या इससे कम उम्र के बच्चों में मलेरिया के मामलों को काफी कम किया जा सकता है। द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित इस ट्रायल रिपोर्ट में कोलराडो स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता ब्रायन डी फॉय ने कहा, 'आइवरमैक्टिन मलेरिया को पनपने नहीं देता और यह व्यक्ति के खून को इस कदर घातक बना देता है कि अगर मच्छर उस व्यक्ति को काटते भी हैं तो वे खुद ही मर जाते हैं। इसकी वजह से अन्य लोगों में भी इंफेक्शन फैलने का खतरा कम रहता है।'आमतौर पर आइवरमैक्टिन का इस्तेमाल रिवर ब्लाइंडनेस से लेकर स्केबीज़ यानी दाद-खाज/खुजली से होने वाले पैरासाइट इंफेक्शन का इलाज करने में किया जाता है। इस स्टडी के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने 18 सप्ताह के परीक्षण के दौरान मलेरिया को कंट्रोल करने के लिए मास आइवरमैक्टिन की प्रक्रिया को दोहराया। स्टडी में 2,700 लोगों को शामिल किया गया, जिनमें पश्चिमी अफ्रीका के बुर्किना फासो के 590 बच्चों को भी शामिल किया गया। 2000 के बाद से वैश्विक स्तर पर मलेरिया से होने वाली मौतों में 48 फीसदी गिरावट आई है। हालांकि इस प्रगति में आर्टेमिसिनिन ड्रग के खिलाफ बढ़ते प्रतिरोध के कारण रुकावट आ रही है। यह ड्रग आइवरमैक्टिन की सफलता का अभिन्न अंग रहा है। ब्रायन ने आगे कहा कि मलेरिया की रोकथाम करने वाले अन्य ऐंटीमलेरियल ड्रग्स और कीटनाशकों की तुलना में आइवरमैक्टिन ज़्यादा प्रभावशाली तरीके से काम करता है। इसी खासियत की वजह से इसे अन्य दवाइयों के साथ बीमारी से जुड़े हर तरह के लक्षण को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।


Updated : 22 March 2019 9:09 PM GMT
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