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ईयरफोन से गाना सुनते हुए सो जाना खतरनाक

ईयरफोन से गाना सुनते हुए सो जाना खतरनाक
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-एक अध्ययन में हुआ खुलासा
लंदन: अध्ययन कर्ताओं की मानें तो सोने से पहले गाने सुनते हुए कान में ईयरफोन लगाकर सो जाना आपके लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसा नहीं कहा जा सकता कि ये आपके लिए जानलेवा है लेकिन इस आदत की वजह से आपको एक अच्छी नींद से समझौता करना पड़ सकता है। बहुत लंबे समय से ये कहा जाता रहा है कि म्यूजिक की सूदिंग यानी आराम देने वाली क्वॉलिटी अच्छी नींद के लिए मददगार होती है। लेकिन हम ये भूल जाते हैं कि हमारी बॉडी की अपनी एक आंतरिक घड़ी होती है जिसे सरकैडियन रिदम भी कहते हैं और हमें इसे फॉलो करना होता है। ऐसे में हम शरीर को किसी और साउंड पर निर्भर कर रहे हैं जो पूरी तरह से नुकसानदेह है। अगर आप नियमित रूप से आर्टिफिशल साउंड सुनकर सोने की आदत डाल रहे हैं तो यह पूरी तरह से अनहेल्दी है।
म्यूजिक सुनने से हमारी नींद इसलिए भी प्रभावित होती है क्योंकि म्यूजिक सुनने के लिए हम अपने स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं जिससे की हमारा फोन पूरे समय हमारे पास ही रहता है। यहां तक की आराम करने और सोने के दौरान भी हमारा फोन हमारे पास ही रहता है। इस वजह से हमारा ब्रेन रेस्ट करने के दौरान भी ऐक्टिव मोड में रहता है और उसे आराम नहीं मिलता है। जब आप म्यूजिक सुनते हुए सो जाते हैं तब आपका ब्रेन पूरी तरह से सो नहीं पाता। इसके कुछ पार्ट ऐक्टिव ही रहते हैं जिससे कि नींद सही नहीं आती और आप बीच रात में ही उठ जाते हैं। आपको 8 घंटे की पूरी नींद नहीं मिल पाती और आपकी हार्ट बीट भी नॉर्मल की तुलना में तेज हो जाती है, जो कि सेहत के लिए काफी नुकसानदेह है। सोते वक्त ईयरफोन लगे रहने से आपका कान डैमेज हो सकता है। अगर हाई वॉल्यूम में म्यूजिक चलाकर सो जाएं तो बॉडी में और भी हार्मफुल इफेक्ट हो सकते हैं। सोते वक्त कान में ईयरफोन लगा रहे तो कान की स्किन पर प्रेशर पड़ता है और स्किन संबंधित समस्या होती है। इससे कानों में वैक्स भी बनता है और आपके सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
हर रात सेफ और अच्छी नींद सोना हर व्यक्ति की प्राथमिकता होनी चाहिए। अगर ऐसा सच में है कि म्यूजिक सुनने से आपको अच्छी नींद आ रही है तो जरूर सुनें लेकिन इयरफोन लगाकर न सोएं और ये आपके हेल्थ को नुकसान न पहुंचाएं। फोन को बेड से दूर रखें और कम आवाज में रेडिओ पर म्यूजिक सुनें। इससे आपकी बॉडी का नैचरल स्लीपिंग पैटर्न प्रभावित नहीं होगा। ये याद रखना जरूरी है कि म्यूजिक आपके मूड को लाइट करता है जिससे आपको नींद आती है लेकिन इससे आपको कभी गहरी नींद नहीं आ सकती। इसलिए सोने के लिए पीसफुल रिलैक्सिंग म्यूजिक पर निर्भर न रहें बल्कि ऐसी हैबिट और लाइफस्टाइल चुनें जिससे की रात में आप गहरी नींद में सो सकें। इसमें कोई दो राय नहीं है कि म्यूजिक सुनना हर किसी को पसंद होता है। अब तो म्यूजिक थेरपी के जरिए मरीजों को ऑल्टरनेट ट्रीटमेंट देने की कोशिश भी की जा रही है।

Updated : 8 Dec 2018 9:53 PM GMT
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