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ज्यादा और गलत दवाओं के इस्तेमाल से बेअसर हो रही एंटीबायोटिक दवाएं

ज्यादा और गलत दवाओं के इस्तेमाल से बेअसर हो रही एंटीबायोटिक दवाएं
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न्यूयार्क: चिकित्सा के क्षेत्र में एंटीबा‍योटिक शब्द का बहुत इस्तेमाल होता है। यह एक ग्रीक शब्द है, जो एंटी और बायोस से मिलकर बना है। एंटी का मतलब है विरोध और बायोस के मायने हैं जीवाणु (बैक्टीरिया)। यानी बैक्टीरिया का विरोध करने वाली चीज। यह जीवाणुओं के विकास को रोकती है। बैक्टीरिया के संक्रमण को रोक उपचार में मदद करती है।
एंटीबायोटिक सूक्ष्‍मजीवियों से होने वाले संक्रमण से शरीर की रक्षा करती है। इनका इस्तेमाल भी संक्रमण से बचने के लिए ही किया जाता है। एंटीबायोटिक्स को एंटिबैक्टिरियल भी कहा जाता है। हम बीमार तब होते हैं, जब शरीर पर खराब बैक्टीरिया का आक्रमण होता है। आमतौर पर स्वस्थ शरीर बैक्टीरिया के इन्फेक्शन को नष्ट कता है। नष्ट करने का काम खून में मौजूद व्हाइट सेल्स करती हैं। बैक्टीरिया का संक्रमण ज़्यादा होता है तो प्रतिरोधक तंत्र उससे मुकाबला नहीं कर पाता। इस स्थिति में आप बीमार पड़ जाते हैं। इस स्थिति में एंटीबायोटिक्स की मदद ली जाती है।
-टीबायोटिक्स सिर्फ़ बैक्टीरियल इंफेक्शन से होने वाली बीमारियों पर असरदार है। वायरल बीमारियों, जैसे- सर्दी-ज़ुकाम, फ्लू, ब्रॉन्काइटिस, गले में इंफेक्शन आदि में इसके इस्तेमाल से कोई लाभ नहीं होता। हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता इन वायरल बीमारियों से ख़ुद ही निपट लेती हैं। एंटीबायोटिक्स दवाएं अनहेल्दी व हेल्दी बैक्टीरिया के बीच फ़र्क़ नहीं कर पातीं, ये हेल्दी बैक्टीरिया को भी मार देती हैं। ये दवाएं सूक्ष्म जीवाणुओं से बनती हैं जो दूसरे-जीवाणुओं को मार देते हैं। एंटीबायोटिक दवाओं के ज़्यादा व ग़लत इस्तेमाल से दवाएं बेअसर हो रही हैं। ये दुनियाभर के चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए यह चिंता का विषय बन गया है। डब्यूएचओ के मुताबिक, भारत में अधिक से अधिक दवाएं एंटीबायोटिक दी जाती हैं।
इस वजह से यहां टीबी बीमारी भयावह होती जा रही है। आंकड़े बताते हैं कि 50 फीसदी से ज्यादा भारतीय दवाओं के नकारात्मक असर का ध्यान नहीं रखते। डॉक्टर से परामर्श लिए बिना एंटीबायोटिक दवाए लेते हैं। सन 2010 में भारत एंटीबॉयोटिक के सेवन के मामले में नंबर एक पर था। 2010 में यहां टीबी के 4 लाख 40 हजार नए मामले सामने आए थे। उन लोगों पर एंटीबॉयोटिक का कोई असर नहीं दिखा था। जिस वजह से कारण 1.5 लाख लोगों की मौत हो खांसी, जुकाम, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, फ्लू, ब्रॉन्काइटिस, गले में संक्रमण और वायरल संक्रमण की वजह से होने वाला निमोनिया में इसका कोई असर नहीं होता।

Updated : 30 Nov 2018 9:30 PM GMT
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