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दिल्ली में चला केजरीवाल का जादू: आप पार्टी को 63 सीट, भाजपा को 7, कांग्रेस का पत्ता साफ

दिल्ली में चला केजरीवाल का जादू: आप पार्टी को 63 सीट, भाजपा को 7, कांग्रेस का पत्ता साफ

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनावों २०२० में आम आदमी पार्टी (आप) का जादू चला है। अरविंद केजरीवाल का लगातार तीसरी बार दिल्ली के सीएम बनना तय हो गया है। दिल्ली की जनता ने शाहीन बाग और नागरिकता संशोधन कानून ( सीएए) के मुद्दे को नकारते हुए स्थानीय मुद्दे के आधार पर वोट दिया। पिछले चुनावों की तरह इस बार भी कांग्रेस इन चुनावों में खाता नहीं खोल पाई। भाजपा ने अपनी टैली मजबूत की है। इन चुनावों में आप ने बड़ी चतुराई से विवादित मुद्दों के किनारा करते हुए स्थानीय मुद्दों पर लोगों से वोट मांगे। केजरीवाल ने चुनावों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दे को उठाया और जनता के बीच इसी आधार पर वोट मांगा। बीजेपी ने शाहीन बाग और सीएए का मुद्दा जोर-शोर से उठाया लेकिन दिल्लीवालों ने इन्हें सिरे से नकार दिया है।

- सबसे मजबूत उम्मीदवार केजरीवाल

दिल्ली चुनाव में केजरीवाल की टक्कर का नेता विपक्ष पेश नहीं कर पाई। पिछले 5 साल में केजरीवाल के किए गए कामों का जनता में अच्छा संदेश गया और जनता ने दिल खोलकर आप को वोट दिया। केजरीवाल की मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि न तो बीजेपी और न ही कांग्रेस ने इन चुनावों के लिए सीएम कैंडिडेट की घोषणा की थी।

- भाजपा का आंकड़ा सुधारा

2015 चुनावों बीजेपी को 3 सीटों पर जीत मिली थी लेकिन इस बार भगवा दल भाजपा को ७ सीट मिली है। बीजेपी ने इस चुनाव में शाहीन बाग और सीएए को मुद्दा बनाया था लेकिन उसे इससे ज्यादा फायदा होता नहीं दिखा। पार्टी को इस मुद्दे के भरोसे जीत का भरोसा था लेकिन केजरीवाल के कामों के आगे बीजेपी की एक नहीं चली।

- कांग्रेस का क्या होगा?

इन चुनावों में सबसे बुरी स्थिति कांग्रेस की रही। 2015 चुनावों में कांग्रेस को कोई सीट नहीं मिली थी और इसबार भी पार्टी को खाता खोलते नहीं दिख रही है। पार्टी की बुरी स्थिति हो गई है। उसका वोट शेयर भी सिंगल डिजिट में चला गया है। कांग्रेस ने हार भी स्वीकार कर लिया है।




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