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मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा- 'एक देश, एक चुनाव' पर सर्वसम्मति जरूरी

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा- एक देश, एक चुनाव पर सर्वसम्मति जरूरी

अहमदाबाद: मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा का कहना है कि जब तक राजनीतिक दल साथ बैठ कर सर्वसम्मति पर नहीं पहुंच जाते और कानून में जरूरी संशोधन नहीं हो जाता तब तक 'एक साथ लोकसभा-विधानसभा के चुनाव' या 'एक देश, एक चुनाव' नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग इस मामले में बहुत कुछ नहीं कर सकता, लेकिन वह ऐसी व्यवस्था को तरजीह देगा।

सुनील अरोड़ा ने कहा कि यह राजनीतिक दलों पर निर्भर करता है कि वे (इस विषय पर) एक साथ बैठें और किसी आमराय पर पहुंचे, कानून में संशोधन करें ताकि चुनाव एक साथ कराये जा सकें। यहां निरमा विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम में अरोड़ा ने कहा, ''जब तक ऐसा नहीं होता है तब तक सेमिनारों में बात करने के लिये यह एक अच्छा विषय है। लेकिन यह बहुत जल्द भी नहीं होने वाला है।''

उन्होंने कहा कि एकसाथ चुनाव 1967 तक देश में हो रहे थे, उसके बाद कुछ राज्यों में विधानसभाओं के भंग होने और अन्य कारणों के चलते ''इस इस व्यवस्था में असंतुलन'' पैदा हुआ। सीईसी ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है, इसके बावजूद भी कुछ लोग इसके उलट दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ''मैं आप सभी से जिम्मेदारीपूर्वक कहना चाहूंगा कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। इसमें खराबी आ सकती है जैसा कि आपकी कार या दोपहिया वाहनों में होता है लेकिन इनसे छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।''

अरोड़ा ने कहा कि ''प्रख्यात वैज्ञानिकों'' ने चुनाव आयोग के लिये ईवीएम और 'वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल' (वीवीपैट) पर काम किया है और इतना सारा काम करने के बाद वीवीपैट तथा ईवीएम को लेकर संदेह जताने पर उन्हें काफी नाखुशी तथा मायूसी होती है। उन्होंने कहा, ''जब हम इस संबंध में ईवीएम (से छेड़छाड़ इत्यादि) को लेकर बातचीत करते हैं तो हम लोग थोड़े अतार्किक हो जाते हैं।'' उन्होंने कहा, ''मतदाता जागरुकता के लिये ऐसे लोगों (समृद्ध लोगों) को नुक्कड़ नाटक नहीं दिखाया जा सकता है। उनके लिये जागरुकता निश्चित रूप से उनके भीतर से आनी चाहिए।''


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